234+ Shama Shayari in Hindi 2024| शमा परवाना शायरी

शमा में ही परवाना जलना चाहता है !!
जैसे मुसाफिर राह पर चलना चाहता है !!

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परवाने के प्यार का, जादू कैसे चलेगा !!
शमा के बिना वह, अकेला कैसे जलेगा !!

परवाना अकेले कब तक आहें भरता !!
शमा पर जलने से इंकार कैसे करता !!

बेखयाली सी छाई है इस दिल में !!
शमा की लौ बुझाई है अब हमने !!

सिर्फ एक बार तुझसे, मिलना चाहूंगा मैं !!
शमा हो तुम, तुम्हें और कहां पाऊंगा मैं !!

इश्क में जलने की तमन्ना कभी ना पूरी हुई !!
शमा पर मर मिटने की आरजू अधूरी रही !!

शमा की याद में वह कब तक रोएगा !!
आखिर पतंगा कब तक राह देखेगा !!

अपने महबूब की याद दिलाए रखना !!
दिल में प्यार की शमा जलाए रखना !!

शमा पर पतंगा जलता रहा !!
अपने ही दर्द को निगलता रहा !!

मैं मोम की तरह पिघलता रहा !!
वो नाजुक शमा सी जलती रही !!

न जाने कैसे उसने ये जिंदगी तारी !!
शमा पर हो गई है अब रात भारी !!

बिन जले शमा के परवाना जल नहीं सकता !!
क्या करे इश्क अगर हुस्न की सबकत न करे !!

इश्क क्या चीज है यह पूछिये परवाने से !!
जिंदगी जिसको मयस्सर हुई मर जाने के बाद !!

किसी को प्यार का मतलब बस इतना सा समझाना !!
शमा के पास जाकर के परवाने का जल जाना !!

हूँ मैं परवाना मगर कोई शमा तो हो रात तो हो !!
जान देने को हूँ हाजिर मगर कोई बात तो हो !!

कितने परवाने जले राज़ ये पाने के लिए !!
शमा जलने के लिए है या जलाने के लिए !!

शमा जिस आग में जलती है नुमाइश के लिए !!
हम उसी आग में गुम-नाम से जल जाते हैं !!

शमा बुझ जाए, मगर रात ना धूप हो !!
मेरी किस्मत में बस यही इंतजार रहे !!

चिराग की रोशनी से ही रातें होती हैं !!
जिंदगी की राहों में यही मोहब्बत होती है !!

शमा को जला लो, पर दिलों को मत बुझा दो !!
मोहब्बत की राह में, रातें हमेशा सवेरा लेकर आती हैं !!

शमा जलती रहे, यही तो उसकी मिसाल है !!
मोहब्बत की राह में हारना, इश्वर की राह में जीतना है !!

रात की अंधकार से लब पे आई शमा !!
राहों में रौंगतें बिखेरती है कहानियों की राह पे !!

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जिंदगी की राहों में हमेशा जलती रहे शमा !!
आसमान को चूमती है, अपनी रौशनी से जगह बनाती है !!

दर्द की शाम है, आँखों में नमी है !!
हर सांस कह रही है, फिर तेरी कमी है !!

नशा नहीं होता चाहे, पी लूं ये मैखाना !!
कहता है, जलती हुई शमा का दीवाना !!चाहत की तमन्ना दिल में दबा कर रखो !!
शमा को महफिल में जलाकर रखो !!

परवाने को शमा पर जल कर कुछ तो मिलता होगा !!
सिर्फ मरने की खातिर तो कोई प्यार नहीं करता !!

परवाने को शमा पर जल कर कुछ तो मिलता होगा !!
यूँ ही मरने के लिए कोई मुहब्बत नहीं करता !!

रात की गहराइयों से निकलती है शमा की रौशनी !!
जीवन की मुश्किलें कम होती हैं उसकी मुस्कानी !!

दिलों को छू जाती है शमा की बात !!
हर दर्द को हल करती है, बनाती है राहों में बात !!

अंधकार की रातों में जलती है शमा !!
सपनों की ऊँचाईयों को छूने की राह पर है वह !!

जीवन के सफ़र में हमेशा साथ है शमा !!
हर मुश्किल को पार करने का वादा करती है वह !!

दिल की धड़कनों में बसी है शमा की गुणगुणाहट !!
जो बताती है कि जीवन का हर पल है खास !!

ये इंतजार ग़लत है की शाम हो जाए !!
जो हो सके तो अभी दौर-ऐ-जाम हो जाए !!

भीगी हुई इक शाम की दहलीज़ पे बैठे !!
हम दिल के सुलगने का सबब सोच रहे हैं !!

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शाम ढले ये सोच के बैठे हम तेरी तस्वीर के पास !!
सारी ग़ज़लें बैठी होंगी अपने-अपने मीर के पास !!

शायर कहकर बदनाम ना करना मुझे दोस्तो !!
मै तो रोज शाम को दिनभर का हिसाब लिखता हूं !!

शाम को आओगे तुम अच्छा अभी होती है शाम !!
गेसुओं को खोल दो सूरज छुपाने के लिए !!

सब इक चराग़ के परवाने होना चाहते हैं !!
अजीब लोग हैं दीवाने होना चाहते हैं !!

शाम भी थी धुआँ धुआँ हुस्न भी था उदास उदास !!
दिल को कई कहानियाँ याद सी आ के रह गईं !!

शामें किसी को माँगती हैं आज भी !!
ज़िंदगी में यूँ मुझे कोई कमी नहीं !!

खो कर पता चलती है कीमत किसी की !!
पास हो तो एहसास किसे होता है !!

एक हसीन सा ख्वाब फिर टूट सा गया !!
दिल एक बार फिर मोहब्बत में जख्मी हो गया !!

तुम्हे देखकर कुछ बोल नही पाता हूं !!
तुझे देखे बिना मैं चैन से रह नही पाता हूं !!

नाकामी मेरी थी इश्क़ में !!
तुझे अपने इश्क़ का एहसास ना दिला सका !!

दुआ में कमी रह गई या मेरे इश्क़ में शायद !!
तभी मेरी मोहब्बत का तुझे एहसास तक ना हुआ !!

इश्क़ भले ही एक तरफा था मेरा !!
मगर पहल तुम्हारी नजरों ने भी किया ही था !!

यकीं हुआ की दिल का साफ़ हूँ मैं !!
तभी तो शायद ठुकरा दिया तुमने मुझे !!

मेरी जिंदगी को खूबसूरत बनाती है !!
ये सर्द रातें तेरी तस्वीर और उन तस्वीरों से हुई बातें !!

कुछ इस तरह मेरी ज़िदगी को मैंने आसान कर लिया !!
भूलकर तेरी बेवफाई मेरी तन्हाई से प्यार कर लिया !!

बदलते वक्त के साथ सब कुछ बदला !!
कुछ नहीं बदला तो तुम्हारे लिए मेरा प्यार नहीं बदला !!

एक तू ही मेरा दिलदार है लेकिन क्या करूं !!
एक दिलदार के साथ एक तरफा प्यार है !!

बड़े अदब से उन्होंने मुझे इश्क़ में इंकार किया !!
कहा के मुझसे अच्छी और मिल जायेगी !!

कमाल है की नज़रें तुमने भी मिलाई !!
मुझसे पर इश्क़ सिर्फ एकतरफा हुआ !!

एक अलग सी मिसाल होगी ये सारे ज़माने में !!
सिर्फ तेरा ही नाम ढूंढेंगे सब मेरे हर फ़साने में !!

ज़रूरी नहीं की हर शिकायत लफ़्ज़ों में ही !!
की जाये कुछ नाराजगियां चुप रह कर भी जताई जाती हैं !!

एक दर्द छुपा हो सीने में तो मुस्कान अधूरी लगती है !!
जाने क्यों बिन तेरे मुझको हर शाम अधूरी लगती है !!

ये ढलती शाम किसी अंत की शुरुवात नहीं !!
यह एक संगम हैं जो जीवन के हर रूप को दिखाता हैं !!

कहाँ की शाम और कैसी सहर, जब तुम नही होते !!
तड़पता है ये दिल आठो पहर, जब तुम नही होते !!

यूँ तो हर शाम उमीदों में गुज़र जाती है !!
आज कुछ बात है जो शाम पे रोना आया !!

दिल की गहराइयों से निकलती है शमा की आवाज !!
हर दर्द को बहुत से किस्सों में बदलती है यह कहानी का सिराज !!

अंधकार को हरा-भरा बनाती है शमा की मुस्कान !!
जीवन के सभी मोड़ों में ले कर चलती है यह कहानी की रौशनी का झंडा !!

Dooriyan Shayari in Hindi |  दूरियाँ शायरी इन हिंदी

रात की चाँदनी में है शमा की मुस्कान !!
जीवन की राहों में बनती है रौशनी का जहाँ !!

दिलों को छू जाती है शमा की बातें !!
हर दर्द को हल करने की है उसकी राहें !!

अंधकार की रातों में जलती है शमा !!
हर रास्ते को सजाती है ख्वाबों की बाहों में !!

जीवन की कठिनाईयों में है साथ शमा का !!
राहों को सजाती है, मुसीबतों को चुराती है !!

दिल में छुपी है एक छोटी सी शमा !!
जो बचपन के सपनों को सच करने की राह पर है !!

रात की चाँदनी में है शमा की रौशनी !!
जीवन की सभी राहों में है उसकी कहानी !!

दिल की धड़कनों में बसी एक प्यारी सी शमा !!
जलती रहे हमेशा, छोड़े ना कभी कोई भी ग़मा !!

अंधकार की रातों में चमकती है शमा !!
सपनों की ऊँचाईयों को छूने की राह पर है वह !!

जीवन की सभी उलझनों में है साथ शमा का !!
हर मुश्किल को पार करने का है उसका वादा !!

दिलों में बसी है एक अनमोल शमा की बात !!
जो हर दिल को छू जाती है, भर देती हर रात !!

ज़िन्दगी के सफ़र में राहों में चमकती है शमा !!
जलती रहे हमेशा, मिटाए अंधकार का ग़मा !!

दिल की दहलीज़़ों में बसी एक प्यारी सी शमा !!
जो जलती है हर दर्द को, बनाती जीवन को संगीत का रमा !!

रात की गहराइयों से निकलती है शमा की सीसी !!
बनाती है राहों में रौंगतें, हर मोड़ पर है उसकी गीती !!

वो जिंदगी ही क्या जिसमे प्यार ना हो !!
और वो मोहब्बत ही क्या जो एक तरफा यार ना हो !!

इस कमबख्त दिल को भी काश यह मालूम होता !!
कि एक तरफा प्यार कभी अपना नहीं होता !!

तबाह होकर भी तबाही दिखती नहीं !!
यह इश्क है जनाब इसकी दवा कहीं बिकती नहीं !!

मोहब्बत यूं ही किसी से हुआ नहीं करती !!
खुद को भूलना पड़ता है किसी को अपना बनाने के लिए !!

Wada Shayari in Hindi | झूठा वादा शायरी

नजाकत है आंखों में या सीरत है यह तुम्हारी !!
मुस्कुरा के कत्ल करते हो या बस आदत है यह तुम्हारी !!

अनदेखे धागों से यू बांध गया कोई !!
वो साथ भी नहीं और हम आजाद भी नहीं !!

एक बार भी नहीं रोका उसने शायद !!
उसे मेरे चले जाने का ही इंतज़ार था !!

होता है दर्द बहुत दिल संभलता नहीं !!
प्यार का वादा कभी लेकिन बदलता नहीं !!

जानता हूं मैं तेरे काबिल नहीं !!
फिर भी क्यों मेरे ख्यालों मैं कोई और शामिल नहीं !!

इश्क करने की नई तरकीब निकाली है !!
इश्क होने की खबर सब से छुपा ली है !!

मोहब्बत तो एक तरफा ही होती है !!
जब दोनों तरफ से हो तो उसे किस्मत कहते है !!

हम एक तरफा चाहने वाले भी कमाल करते हैं !!
किसी से डरे ना डरे बस प्यार के इजहार से डरते हैं !!

टूटे हुए कांच की तरह हम चूर हो गए !!
किसी को लग न जाए इसलिए सबसे दूर हो गए !!

तेरे होंठ चूमने की ख्वाहिश है !!
पर इजाजत तेरे साए को छूने की भी नहीं है !!

दिलों को छू जाती है शमा की बातें !!
हर आँसू को देती है !!
खुशियों की मिठास बातें !!

अंधकार की रातों में है शमा की चमक !!
हर जख्म को भर देती है !!
जीवन को बना देती है एक किताब !!

दिल में बसी है एक छोटी सी शमा !!
जो जलती है आसमान में !!
बनाती है तारों से साथ जीने की बहाना !!

बहुत रुलाया हैं !!
इस एक तरफ़ा मोहब्बत ने !!
पर दर्द महसूस ही नहीं होता !!

गलती हमसे न जाने क्या हुई !!
वो हमें ऐसे भूल गए जैसे !!
कभी पहचानते ही नहीं थे !!

तेरी मुस्कान देख कर मैं खुद मुस्कुराता हूं !!
अगर तू रो दे ना तो तेरी कसम !!
मैं जीते जी मर जाता हूं !!

प्यार में हम नादान रह गए !!
उससे प्यार तो बहुत किया !!
पर उसे एहसास ना दिला सके !!

ख्वाहिश भले ही छोटी हो !!
मगर उसे पूरा करने के लिए !!
दिल का होना बहुत जरूरी है !!

जिंदगी में कोई काम पड़े तो याद कर लेना !!
बिताए पलों के खातिर ही सही !!
कुछ पल मुझ पर बर्बाद कर लेना !!

इश्क एकतरफा हो !!
तो सामने वाले की यादें ही !!
सब कुछ होती है !!

पलकों कि इस लुक-छुपी को दिल कहते हैं !!
मैं प्यार मांग लूं ना कहकर तुम हंस देती हो !!
कैसे मै मान लूँ !!

जान लेने पर तुले हैं दोनों मेरा !!
इश्क हार नहीं मानता !!
और दिल बात नहीं मानता !!

प्यार अपना है यह कहते कहते !!
कभी हां पता ही नहीं चला !!
साला हमारा प्यार भी एक तरफा निकलेगा !!

मुझे यह यकीन है !!
तुम्हारी यह दुआ कभी कबूल ना होगी !!
कि मुझे तुमसे कोई बेहतर मिल जाएगी !!

तुझे किसी से भी मोहब्बत हो !!
मुझे फर्क नहीं पड़ता !!
क्योंकि मेरी यह मोहब्बत तो सिर्फ तुझसे ही है !!

खुद से खुदा से या शायद पूरी दुनिया से !!
लड़ने के लिए तैयार थे हम तेरे लिए !!
लेकिन अब तुझसे ही कैसे लड़े- अपने लिए !!

जान तो उस वक्त निकलती है !!
जब अपना प्यार किसी और का जिक्र !!
अपनी बातों में करता रहे !!

ना जाने कितनी मोहब्बत !!
इस बात पर खत्म हो जाती हैं !!
कि माँ बाप नहीं मानेंगे !!

वो चाँद है मगर आप से प्यारा तो नहीं !!
परवाने का शमा के बिन गुजारा तो नहीं !!
मेरे दिल ने सुनी है एक प्यारी सी आवाज़ !!
कहीं महफ़िल में आपने मुझे पुकारा तो नहीं !!

बहते वक़्त की रफ़्तार रुक गयी होती !!
शरम से आँखें झुक गयीं होती !!
अगर दर्द जानती शमा परवाने का !!
तो जलने से पहले बुझ गयी होती !!

ये सिलसिला उल्फ़त का चलता ही रह गया !!
दिल की चाह में दिलबर मचलता ही रहा गया !!
कुछ देर जल के शमा खमोश हो गयी !!
परवाना मगर सदियों तक जलता ही रह गया !!

कभी दिल को कभी शमा को जला कर रोये !!
तेरी याद को दिल से लगा कर हम रोये !!
रात की गोद में जब सो गयी सारी दुनिया !!
चाँद को तेरी तस्वीर बना कर हम रोये !!

वो शमा की महफ़िल ही क्या !!
जिसमे परवाना जल कर ख़ाक न हो !!
मज़ा तो तब आता है चाहत का मेरे दोस्त !!
जब दिल तो जले मगर राख न हो !!

शाम सूरज को ढलना सिखाती है !!
शमा परवाने को जलना सिखाती है !!
गिरने वाले को होती तो है तकलीफ !!
पर ठोकर इंसान को चलना सिखाती है !!

जलाकर रखती है !!
मोहब्बत की शमा !!
न ज़ाने कितने आशिक !!
हो जाते इसमें फना !!

ये दिल जाएगा !!
कहां छोड़कर ठिकाना !!
आखिर शमा के !!
पास ही आएगा परवाना !!

नूर को चमकाने के लिए !!
जलानी नहीं पड़ती शमा !!
तेरे हुस्न की चमक से !!
शर्माता होगा चंद्रमा !!

हर कोई हुस्न का !!
यार के, दीवाना होता है !!
शमा की हर महफिल में !!
वो परवाना होता है !!

शमा जब जलती हैं !!
तो जहां रौशन हो जाता हैं !!
और जब आशिक जलता हैं !!
तो एक अफसाना बन जाता हैं !!

प्यार को कितना भी !!
कहे बुरा यह जमाना !!
कहां सुनता है मगर !!
शमा का वो परवाना !!

अब कोई परवाना !!
जलता नहीं शमा में !!
ये किस्से सुना करते थे !!
हम अपने बचपन में !!

कितनी भी छिपाओ बात !!
पता चल कर रहती है !!
कितना भी रोक लो !!
शमा जलकर रहती है !!

तुझे याद कर ही !!
हर रात में सोए हम !!
शमा की महफिल में !!
भी बहुत रोए हम !!

तेरी याद दिल की !!
आरजू मिटा देती है !!
शमा ही पतंगे को !!
जलना सिखा देती है !!

खुद को मस्ती में !!
उसकी खोना चाहते हैं !!
उस शमा के सभी !!
परवाने होना चाहते हैं !!

परवाना प्यार पर अपनी !!
सारी खुशियां लुटाता है !!
शमा के लिए वह अपनी !!
सारी जिंदगी मिटाता है !!

एक न एक दिन वो उस !!
शमा की लौ को बुझाता है !!
कुछ भी हो पतंगा खुद को !!
जलाकर ही रहता है !!

कहां ढूंढू, इस जालिम !!
जमाने में वफा नहीं मिलती !!
खफा है जबसे महबूब मेरा !!
प्यार की शमा नहीं जलती !!

न जाने कितने शमा के !!
अफसाने जलने होंगे !!
न जाने यार के कितने !!
सितम झेलने होंगे !!

शमा ने इस वहम में !!
जान ली आज परवाने की !!
की सुबह कहीं आम न हो !!
जाऐ बात रात की !!

दोस्ती कब प्यार में !!
और प्यार कब धोखे !!
में बदल जाये !!
कुछ पता ही नहीं चलता !!

मेरे साथ तुम रहोगी तो सारी बलाये टल जाएगी !!
तुझे छूना तो चाहता हु !!
मेरी सारी ऊँगली कट जाएगी !!
चुकाना पड़ता है !!

अगर मोहब्बत उनसे न मिले !!
जिसे आप चाहते हैं !!
तो मोहब्बत उसको ज़रु देना !!
जो आपको चाहते हैं !!

कुछ खुशबू सा लिखना था !!
क़िरदार से ज़्यादा क्या लिखूं !!
सुनो अब ज़िंदगी लिखनी है !!
दोस्त और रिश्तों से ज़्यादा क्या लिखूं !!

हँसी ने लबों पे थिरकना छोड़ दिया है !!
ख्वाबों ने पलकों पे आना छोड़ दिया है !!
नही आती अब तो हिचकियाँ भी !!
शायद आप ने भी याद करना छोड़ दिया है !!

बड़े सुकून से वो रहता है !!
आज कल मेरे बिना !!
लगता है जैसे सदियों से !!
उसके उपर बोझ थे हम !!

हर दुआ में तुम्हें माँगा !!
फिर भी दुआ कबूल ना हुई !!
हमारी तो चाहत बस एक तुम थी !!
फिर भी चाहत कबूल ना हुई !!

बड़े सुकून से वो रहता है !!
आज कल मेरे बिना !!
लगता है जैसे सदियों से !!
उसके उपर बोझ थे हम !!

कुछ लफ्ज़ हम आम लिखते है !!
पागल खुद को सरेआम लिखते है !!
पिला दो अभी नशीली आंखों से !!
इन आँखों को हम जाम लिखते हैं !!

उसपे गुरूर था मुझे के !!
मेरा प्यार शीशे कि तरह साफ़ है !!
जब पता चला कि मेरा प्यार तो !!
एकतरफ़ा है तो मेरा गुरूर टूट गया !!

नसीब का तो पता नहीं !!
पर दुआओं में !!
हर वक़्त लबों पर !!
तेरा ही नाम आता है !!

ख़ुश्बू को भी काटने की अदा रखता है !!
मेरा हमसाया मुझे ख़ुद से जुदा रखता है !!
इतनी बिनाई तो रख अपनी नज़रों में शम्स !!
झुकी पल्कों में दिखे तुझे वो कहाँ रखता है !!

मेरा इश्क मुझे तोड़ गया !!
उसे एकतरफ़ा प्यार था !!
ये समझने में मैं नाकाम रहा !!
वो मुझे बीच मझधार में छोड़ गया !!

राब्ते खत्म करने से !!
मोहब्बत कम नहीं होती !!
दिल में वो भी रहते हैं !!
जो दुनिया छोड़ देते हैं !!

मैने उससे कभी मुलाकात नहीं कि !!
रोज़ Facebook पर उसके Profile का !!
Banner बनता था मैं !!
प्यार सिर्फ़ मेरा था उसका नहीं !!

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